Advani.

Rohit Rajeev Dubey posted: ” आज इस तस्वीर पर हर पेज पर meme बनेंगे, चुटकुले सुनाए जाएंगे, तो कोई इसे शताब्दी की सबसे दर्दनाक हादसा या तस्वीर बताएगा। लेकिन अगर दुनिया वाजपेयी जी को भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह मानती है तो मैं आडवाणी जी को भा.ज.पा. का विदुर मानता हूँ। महाभारत” Respond to this post by replying above this line

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Advani.
by Rohit Rajeev Dubey

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आज इस तस्वीर पर हर पेज पर meme बनेंगे, चुटकुले सुनाए जाएंगे, तो कोई इसे शताब्दी की सबसे दर्दनाक हादसा या तस्वीर बताएगा। लेकिन अगर दुनिया वाजपेयी जी को भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह मानती है तो मैं आडवाणी जी को भा.ज.पा. का विदुर मानता हूँ। महाभारत में सिर्फ विदुर ही थे जिन्हें अंधे को अंधा और अधर्म को अधर्म कहने का साहस इनके मुंह पे ही था। पांडवों को लाक्षागृह से सकुसल बचने वाले भी विदुर थे। किंतु इस चरित्र ने कभी किसी प्रकार की प्रशंसा या अतिरिक्त सम्मान की ललक या भूख नही दिखाई।

आज जो लोग ये सोचते है कि उम्र के इस पड़ाव पे आके किसी पद या उपाधि की तृष्णा होगी उन्हें जानना जरूरी है कि आडवाणी जी ने वाजपेयी जी व पार्टी हित मे प्रधानमंत्री का पद टैब स्वेच्छा से त्याग दिया था जब वो सबसे बड़े नेता हुआ करते थे (जी हां 90 के दशक में जब भाजपा में एकछत्र राज करते थे व कार्यकर्ताओं में उनकी तूती बोलती थी)।

माली जब बाग में पेड़ लगाता है , अपने पसीने से उसे सींचता है तो यह नही सोचता कि वो उस पेड़ की छांव लेगा या फल तोड़ेगा। वो तो यही सोच के पस्रन्नंचित्त हो जाता है कि आने वाली पीढियां उसके लगाए पेड़ की छांव लेगी या फल खायेगी।

प्रिय आडवाणी जी भारतीय राजनीति में आप हमेशा अपनी जीवटता व त्याग के लिए जाने जायेंगे। आपकी विदुरनीति व त्याग अवश्य ही भाजपा रूपी वटवृक्ष को संरक्षित करेगी ।

जय हो!


Today, meme will be heard on every page on this picture, jokes will be heard, so someone will tell it the most painful accident or photo of the century. But if the world views Vajpayeeji as the father-in-law of Indian politics, then I would advise Advaniji with the help of the BJP. I feel lonely. In the Mahabharata, there was only Vidur who had the courage to blind the blind and the right to say unrighteousness is wrong on his face. The survivors who survived the Pandavas from the lakshaksh place were also vidur. But this character did not show any kind of admiration or any respect or hunger for hunger or hunger.

Today, people who think that on this stage of age, they will have a desire for any post or title. It is important to know that Advani had voluntarily abandoned the post of Prime Minister in Vajpayee ji and the party’s interest when he was the greatest leader. (Yes, in the 90s when there was a narrow rule in the BJP and used to talk to them in the workers).

When Malis plant trees in the garden, if they sweat them with their sweat, then it does not think that they will take the shade of that tree or break the fruit. He becomes interested in thinking that the coming generations will take the shade of the tree or plant his fruit.

Dear Advaniji, in Indian politics, you will always be known for their self-sacrifice and sacrifice. Your aptitude and sacrifice will definitely preserve the tree of the BJP.

Jai Ho!

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