Streets Of Firozabad… — DILKASH SHAYARI

गलियाँ तो कहीं की हों खूबसूरत और हसीन ही होती है और ऊपर से गर महबूब के मौहल्ले / शहर की हों तो सोने पे सुहागा जैसी बात हो जाती है? और हज़ूर फिर वो आकर कुछ यूँ फरमायें तो…. ” Aap Abhi tak Firozabad ki galiyon mai h.. Kabhi humse bhi takraiye janab!! […]

via Streets Of Firozabad… — DILKASH SHAYARI

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